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हाइकु-2 / भावना कुँअर

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[[Category:हाइकु]]
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13नाचती-गातीझूमती शाखाओं पेखिला यौवन।14खेत है वधूसरसों हैं गहनेस्वर्ण के जैसे ।15चिड़ियॉं गातींघंटियॉं मन्दिर कीगीत सुनातीं।16चाँदनी रातजुगनुओं का साथहाथ में हाथ।17खिड़की परहै भोर की किरणनृ़त्यागंना -सी ।18लेटी थी धूप सागर तट पर प्यास बुझाने ।19दुखी हिरणी खोजती है अपना बिछड़ा छौना।20परदेस मेंजब होली मनाई। तू याद आई।21नन्हा -सा बच्चामॉं के आँचल में हैलिपटा हुआ ।22नन्हें हाथों सेमुझको जब छुआजादू -सा हुआ ।23रुनझुन -सीपायल थी खनकीगोरे पॉंव में।24सुबक पड़ीकैसी थी वो निष्ठुरविदा की घड़ी।
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