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"हिरोशिमा की पीड़ा / अटल बिहारी वाजपेयी" के अवतरणों में अंतर

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किसी रात को   
 
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मेरी नींद आचानक उचट जाती है   
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मेरी नींद चानक उचट जाती है   
 
आँख खुल जाती है   
 
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मैं सोचने लगता हूँ कि   
 
मैं सोचने लगता हूँ कि   

17:09, 28 जनवरी 2011 के समय का अवतरण

किसी रात को
मेरी नींद चानक उचट जाती है
आँख खुल जाती है
मैं सोचने लगता हूँ कि
जिन वैज्ञानिकों ने अणु अस्त्रों का
आविष्कार किया था
वे हिरोशिमा-नागासाकी के भीषण
नरसंहार के समाचार सुनकर
रात को कैसे सोए होंगे?
क्या उन्हें एक क्षण के लिए सही
ये अनुभूति नहीं हुई कि
उनके हाथों जो कुछ हुआ
अच्छा नहीं हुआ!

यदि हुई, तो वक़्त उन्हें कटघरे में खड़ा नहीं करेगा
किन्तु यदि नहीं हुई तो इतिहास उन्हें
कभी माफ़ नहीं करेगा!