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समानता की किताब / डेनियल बोर्ज़ुत्स्की / राजेश चन्द्र

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यहाँ जुटते हैं पाठक
किताबों की मौत देखने के लिए।
वे अचानक मर जाती हैं,
जैसे हवाई जहाज़ से फेंक दिए जाने पर
या कि हृदय गति रुक जाने से
मर जाए कोई स्वतः ही।
वे जीवित रहती हैं, फिर अचानक मर जाती हैं,
और उन पाठकों पर, जो तत्क्षण
देख रहे होते हैं किताबों का मरना,
उन पर बौछार कर दी जाती है
उन छवियों की जो ली गई थीं
लिपस्टिक मुस्कान वाली उस पत्रकार के साथ
जिसे दिखानी थी किताबों की मौत से जुड़ी रिपोर्ट।
दूध में ज़हर था और बयालीस बच्चे मर गए थे,
वह हँसती है, क्योंकि वह लाड़ करती है
मृत किताब की राख़ से।
बयालीस बच्चों की मौत की क़ीमत
इस किताब की मौत के बराबर है
जिसकी क़ीमत नब्बे साल की
उस वृद्ध महिला की क़ीमत के बराबर है
जिसने ख़ुद को उस वक़्त गोली मार ली
जिस वक़्त इन्तज़ार कर रहा था अफ़सर
दरवाज़े पर उसकी बेदख़ली की नोटिस लिए
जिसकी क़ीमत बराबर है
वैश्विक अर्थव्यवस्था के ध्वंस के
जो बराबर है उस क ख ग देश की सेना के
जो छीन रही है ज़मीनें
अर्द्ध-घूमन्तू शिकारियों और खेतिहरों की
रहते आए थे हज़ारों-हज़ार सालों से जो
इस स्थानीय वर्षा-वन में।
पाठक एक मृत किताब खोलता है
उसे मिलती है एक अनन्त राशि
राख़ की, जिल्द की परतों के बीच,
और राख़ जब हवा में उड़ती है
तो लिपस्टिक से आवाज़ आती है कि
दुनिया की हर एक मौत समान है
दुनिया की हर दूसरी मौत के
जो कि समान है दुनिया में हर एक जन्म के
जो विलगाव के हर एक कृत्य के समान है
जो समान है एक जंगल की मौत के
जो समान है एक वैश्विक अर्थव्यवस्था के ध्वंस के,
और हाँ, देखो उस एक और महिला को
जो गिर रही है खिड़की से बाहर,
वह उस कवि के जैसी लगती है
जिसे फेंक दिया गया है उसके देश से बाहर
उस लेखनी की वजह से
जिसका उससे कोई सम्बन्ध नहीं है
और जिसकी मौत उस लड़की की मौत के समान है
जिसे गोली मार दी गई बस में
स्कूल जाते वक़्त आज सुबह ही
यह समान है उस दाढ़ी वाले आदमी के
जिसका सिर एक थैले में ठूँस दिया गया था
गड़हे में पानी भरने से पहले और
कुछ देर की मौत के बाद वह जी गया फिर से
और बोलता रहा, बोलता ही रहा
वह समान था स्टेरॉयड के उस इंजेक्शन के
जो अवैध रूप से लगाया गया था
उस ख़ूबसूरत आदमी की बाँह में
जो कमाता है हर साल चालीस मिलियन डॉलर
अपनी बाँह में स्टेरॉयड के इंजेक्शन लगवा कर
ताकि घुमा सके और अधिक कौशल के साथ
लकड़ी की स्टिक को गेन्द के ऊपर,
और राख़ में हमने देखा उस सच्चे लोकतन्त्र को
जो सदा से वहीं था : अरे देखो
एक छोटा-सा बच्चा मिला है खत्ते में
यह कितना समान है उस सभ्य राष्ट्र की
मुस्काती लिपस्टिक से, जिसके नागरिक
बाढ़ में डूबी गलियों में ढूँढ़ते हैं घर अपने,
और राख़ में इस मृत किताब के
जो गलियाँ मृत पड़ी हैं,
वे समान हैं फ़िल्मी सितारों के
खान-पान से सम्बन्धित विकारों के
समान हैं मृत सैनिकों के, घरदौड़ के समान हैं
समान हैं उन बमों के जिन्हें देश एबीसी ने
गिराया है एक विवाह-समारोह पर
क ख ग देश के किसी गाँव में
समान हैं उस धरती के जो
निगलती-भक्षण करती ही जा रही है
तमाम परदेशी लोगों को
जो समान है साक्षरता की अवनति के
इस ग्रह के सर्वाधिक शिक्षित राष्ट्र में।
इस किताब का कोई अन्त नहीं है।
कोई पैराग्राफ़ नही बदलता
कि मुस्काती लिपस्टिक का क्रम भंग न हो
जो बढ़ती है भस्मीभूत शब्दों के तन्तु के साथ
कि किस तरह शान्ति की घोषणा समान है
युद्ध के पुनः आरम्भ की घोषणा के
और किस तरह गिरती हुई लाशें समान हैं
उन पक्षियों के जो उठतें हैं ऊपर को
किस तरह एफिल टावर में रखा बम
समान है प्राकृतिक गैस की बढ़ती क़ीमतों के,
और समान हैं कीचड़ में सरसराहटों की आवाज़ें
इमारत से फेंके गए
क़ीमती सूटों की सरसराहटों के
और ये सब समान हैं उस चुप्पी के
जो एक साँस में प्राण लेती
और दूसरी में लाड़ करती है जीवन से।

अँग्रेज़ी से अनुवाद : राजेश चन्द्र

लीजिए, अब यही कविता मूल अँग्रेज़ी में पढ़िए
       
                    The Book of Equality
                    BY DANIEL BORZUTZKY

Here the readers gather to watch the books die.
They die suddenly, as if thrown from an airplane,
or from spontaneous cardiac arrest. They live,
and then suddenly they die, and the reader
who watches this is at the moment of
the books' death bombarded with images
documented through the smiling lipstick face
of a journalist who has shown up to report
on the death of the books. The milk was poisoned
and forty-two babies died, she laughs, as she
fondles the ashes of the dead books. And the
death of forty-two babies is equal in value to the
death of this book which is equal in value to the
ninety-year old woman who shot herself
while the sheriff waited at her door with
an eviction notice which is equal in value
to the collapsing of the global economy
which is equal to the military in country
XYZ seizing the land of the semi-nomadic
hunters and cultivators of crops
who have lived in the local rain forest
for thousands of years. The reader opens
a dead book and finds an infinite amount of
burnt ash between the bindings,
and when the ash blows in the wind
the lipstick says that every death
in the world is equal to every other death
in the world which is equal to every birth
in the world which is equal to every act of
dismemberment which is equal to the death
of a jungle which is equal to the collapse
of the global economy; and hey look there’s
another lady falling out of a window;
she looks about equal to the poet hurled out
of his country for words he wrote but
which did not belong to him and
whose death is about equal to the girl
who was shot on the bus on her way
to school this morning which is just about
the same as the bearded man whose head
was shoved into a sac while water was
dumped over it and he died for an instant
and came back to life and talked and talked
and that’s about equal to the steroid illegally
injected into the arm of a beautiful man who
makes forty million dollars a year for injecting
his arms with steroids so he can more skillfully
wave a wooden stick at a ball, and in the ash
we see the truest democracy there ever was:
hey look it’s a little baby found in a dumpster
how equal you are says the smiling lipstick
to the civilized nation whose citizens
walk the flooded streets looking for their homes,
and in the ashes of the dead book
the dead streets are equal to the eating
disorders of movie stars which are equal
to the dead soldiers who are equal to the
homeruns which are equal to the bomb
dropped by country ABC over weddings
in the village of country XYZ which is
equal to the earth swallowing up and
devouring all of its foreigners which is
just about equal to the decline in literacy
in the most educated nation in the planet.
There is no end to this book.
There are no paragraph breaks to interrupt
the smiling lipstick that goes on and on
in one string of ashy words about how
the declaration of peace is equal to
the resumption of war and how
the bodies that fall are equal
to the birds that ascend and how
the bomb in the Eiffel Tower is equal
to the rising cost of natural gas,
and the murmurs of the voices
in the mud are equal to the murmurs
of the expensive suits falling out of
buildings and these are equal to the
silence that kills with one breath
and coddles life with another.