भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए

बिंदु दो / मुदित श्रीवास्तव

Kavita Kosh से
सशुल्क योगदानकर्ता ५ (चर्चा | योगदान) द्वारा परिवर्तित 12:49, 12 अगस्त 2020 का अवतरण ('{{KKGlobal}} {{KKRachna |रचनाकार=मुदित श्रीवास्तव |अनुवादक= |संग्र...' के साथ नया पृष्ठ बनाया)

(अंतर) ← पुराना अवतरण | वर्तमान अवतरण (अंतर) | नया अवतरण → (अंतर)
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

दुःख का आना और जाना
किस बात पर निर्भर करता होगा?
कितने सारे उत्तरों का
एकमात्र प्रश्न दुःख है?
किसी भी भाव को भीतर
ग्रहण करने से पहले
दुःख का अर्पण भीतर से हो जाता है!
सुख, दुःख का विलोम हो या न हो
सामान्तर ज़रूर है।
प्रेम दो बिंदुओं की तरह
दुःख के बीच विद्यमान है!