भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए

मेरा तुम पे अथिकार / सुनीता पाण्डेय 'सुरभि'

Kavita Kosh से
Rahul Shivay (चर्चा | योगदान) द्वारा परिवर्तित 18:23, 27 मई 2019 का अवतरण ('{{KKGlobal}} {{KKRachna |रचनाकार=सुनीता पाण्डेय 'सुरभि' |अनुवादक= |स...' के साथ नया पृष्ठ बनाया)

(अंतर) ← पुराना अवतरण | वर्तमान अवतरण (अंतर) | नया अवतरण → (अंतर)
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

मेरा तुम पर अथिकार, है या नहीं अब।
बता दो सनम प्यार, है या नहीं अब।

ज़माने का हर रंजो-ग़म मैं सहूँगीं।
न तुमसे कभी कोई शिकवा करूँगी।
मेरे दिल की धड़कन तुम्हीं हो सजन अब,
तुम्हारे बिना मैं न अब जी सकूँगी।
मुहब्बत से इकरार, है या नहीं अब।
बता दो सनम प्यार, है या नहीं अब।

कहा था जो तुमने, तुम्हे याद होगा।
न वादों का झूठा, ये संवाद होगा।
मेरे दिल की दुनिया के सुलतान बोलो,
मुहब्बत का ये नीड, आबाद होगा।
चमन दिल का गुलजार, है या नहीं अब।
बता दो सनम प्यार, है या नहीं अब।

मेरी हर खता को, मेरे रब भुलाना।
मगर दूर मुझसे, कभी तुम न जाना।
मुझे साथ रखना दे बाँहों का झूला,
जिगर में है साँसों का जबतक ठिकाना।
कहो मुझसे इकरार है या नहीं अब।
बता दो सनम, प्यार है या नहीं अब।