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लब पे आती है दुआ बन के तमन्ना मेरी / इक़बाल

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लब[1] पे आती है दुआ[2] बनके तमन्ना मेरी
ज़िन्दगी शमअ की सूरत हो ख़ुदाया मेरी

दूर दुनिया का मेरे दम अँधेरा हो जाये
हर जगह मेरे चमकने से उजाला हो जाये

हो मेरे दम से यूँ ही मेरे वतन की ज़ीनत[3]
जिस तरह फूल से होती है चमन की ज़ीनत

ज़िन्दगी हो मेरी परवाने की सूरत या रब
इल्म[4] की शमअ से हो मुझको मोहब्बत या रब

हो मेरा काम ग़रीबों की हिमायत[5] करना
दर्द-मंदों से ज़इफ़ों[6] से मोहब्बत करना

मेरे अल्लाह बुराई से बचाना मुझको
नेक जो राह हो उस राह पे चलाना मुझको

शब्दार्थ
  1. अधर
  2. प्रार्थना
  3. शोभा
  4. विद्या
  5. सहायता
  6. बूढ़ों