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"(हाइकु)13-24 / सुधा गुप्ता" के अवतरणों में अंतर

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<poem>
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13
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काँटों की खेती
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जीवन जोत दिया
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चुभे तो रोती ?
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14
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मेघ मुट्ठी में
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क़ैद चाँद , फिसला
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निकल भागा ।
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15
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कौन पानी पी
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बोलती री चिड़िया
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इतना मीठा !
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16
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पूनो की रात
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चाँद ने बहकाया
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लहरें उड़ीं ।
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17
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गुल्लक फोड़
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चुलबुली रात ने
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बिखेरे सिक्के ।
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18
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उली चादर
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चटक चाँदनी की
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बैठे हैं तारे ।
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19
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धुआँ चिलम
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नशाखोर शाम ने
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लगाया दम ।
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20
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फूलों का सही
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टूट गई कमर
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बोझ उठाते ।
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21
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काली चादर
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उजाले के फूल से
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काढ़ती रात ।
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22
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धूप से डर
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पीली छतरी ओढ़े
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खड़ा वैशाख ।
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23
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बेसुध पड़ी
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नींद के घोंसले में
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पाखी -बिटिया ।
+
24
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यादों की लोई
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खूँटी पर टँगे-टँगे
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कीड़े कुतरी ।
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-0-
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18:26, 18 मई 2012 के समय का अवतरण