भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए

आशा के दीप / उर्मिल सत्यभूषण

Kavita Kosh से
सशुल्क योगदानकर्ता ५ (चर्चा | योगदान) द्वारा परिवर्तित 21:29, 22 अक्टूबर 2019 का अवतरण ('{{KKGlobal}} {{KKRachna |रचनाकार=उर्मिल सत्यभूषण |अनुवादक= |संग्रह...' के साथ नया पृष्ठ बनाया)

(अंतर) ← पुराना अवतरण | वर्तमान अवतरण (अंतर) | नया अवतरण → (अंतर)
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

आशा के दीप जलाती हूँ
मैं तमस हटाने आई हूँ
मैं नित नित गीत रचाती हूँ
नव-गीत सुनाने आई हूँ
आँखों के आंसू मत देखो
होंठो पर खिली स्मित देखो
मैं प्रेम सुगंध फैलाती हूँ
मैं जग महकाने आई हूँ
कितनी घायल जैसी धरती
बाहर खिलती, भीतर जलती
पर फिर भी मैं मुस्काती हूँ
तुमको भी हंसाने आई हूँ
यह जीवन का बीहड़ पथ है
हर प्राण यहाँ पर आहत है
मैं क्षत पग को सहलाती हूँ
मैं दर्द बंटाने आई हूँ
ओ कलियो, खिलो, फूलो, फूलो
अधिकार तुम्हारा तुम जी लो
मैं मुक्ति मंत्र सिखलाती हूँ
मैं तुम्हें जगाने आई हूँ।