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चलो लौटें भगीरथ / योगक्षेम / बृजनाथ श्रीवास्तव

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चलो
लौटें भगीरथ
वानप्रस्थी उन दिनों में

जिन दिनों
यह पूतनीरा
आपके पीछे चली थी
घाट पर के
मन्दिरों में
शंख की ध्वनियाँ बजीं थीं

चलो
लौटें भगीरथ
मंत्रमुग्धी उन दिनों में

जिन दिनों
यह गन्धवह
आश्रम सुवासित कर रही थी
ऋषिकुलों की
मंत्रवाणी
मूल्यमानव रच रही थी

चलो
लौटें भगीरथ
यज्ञपूती उन दिनों में

जिन दिनों
वनराजियाँ
हिरनों , कपोतो सँग रहीं थीं
वेद ने ,
आरण्यकों ने
यशकथा जिनकी कही थी

चलो
लौटें भगीरथ
सृजनधर्मी उन दिनों में