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बन्नी उड़ी उड़ी डोले, बन्नी फूली फूली डोले / हिन्दी लोकगीत

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   ♦   रचनाकार: अज्ञात

बन्नी उड़ी उड़ी डोले, बन्नी फूली फूली डोले
मेरी दूरों से आएगी बारात, मुझे तो ससुराल जाना
वहाँ बाबा नहीं होगें वहाँ दादी नहीं होगीं
मेरे कैसे कटेगें दिन-रात, मुझे तो ससुराल जाना

बन्नी उड़ी उड़ी डोले, बन्नी फूली फूली डोले
मेरी दूरों से आएगी बारात, मुझे तो ससुराल जाना
वहाँ पापा नहीं होगें वहाँ मम्मी नहीं होगीं
मेरे कैसे कटेगें दिन-रात, मुझे तो ससुराल जाना

बन्नी उड़ी उड़ी डोले, बन्नी फूली फूली डोले
मेरी दूरों से आएगी बारात, मुझे तो ससुराल जाना
वहाँ भईया नहीं होगें वहाँ भाभी नहीं होगीं
मेरे कैसे कटेगें दिन-रात, मुझे तो ससुराल जाना

बन्नी उड़ी उड़ी डोले, बन्नी फूली फूली डोले
मेरी दूरों से आएगी बारात, मुझे तो ससुराल जाना
वहाँ जीजा नहीं होगें वहाँ दीदी नहीं होगीं
मेरे कैसे कटेगें दिन-रात, मुझे तो ससुराल जाना