भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए

सोलहवीं मोमबत्ती / प्रदीपचन्द्र पांडे

Kavita Kosh से
अनिल जनविजय (चर्चा | योगदान) द्वारा परिवर्तित 23:28, 8 जनवरी 2011 का अवतरण (नया पृष्ठ: {{KKGlobal}} {{KKRachna |रचनाकार=प्रदीपचन्द्र पांडे |संग्रह= }} {{KKCatKavita‎}} <Poem> सोलहवी…)

(अंतर) ← पुराना अवतरण | वर्तमान अवतरण (अंतर) | नया अवतरण → (अंतर)
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

सोलहवीं मोमबत्ती के
होते हैं
पंख

वह फूँकने से बुझती नहीं
उड़ने लगती है

जहाँ-जहाँ टपकती हैं
उसकी बूँदें
वहाँ कुछ जलता नहीं
सिंकता-सा है

और सुरक्षित रहता है
सब कुछ
बूँद के नीचे !