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हे कोसी माय / अभिनंदन

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हे कोसी माय
के नजरैलकौं तोरा
के बहकैलकौं
जे हेनोॅ उमताय गेलौ
जीतोॅ जिनगी में भाँगटोॅ लगाय गेलौ

हे कोसी माय
तोंय कुँआरियोे होय केॅ
माय कहावै छौ
की माय के हेने कठोर जी होय छै
कि आपने बेटी सवासिन के मांग धोय छै
नै हेनोॅ तेॅ कहियो नै सुनलेॅ छियै
कि माय आपने बेटा-पोता के लहू पियेॅ

कहीं हमरे भूल पर तेॅ
नाखुश नै होय गेलोॅ
महाकाली के रूप धरलौ
सुनै छियै माय
कि एक दाफी एक महाबली
तोरा रातो रात बान्है लेॅ चाहलेॅ छेलै
मतरकि नै बान्हेॅ पारलकै
तोरा के बान्हेॅ पारलकौं
फेनू तोरा माय कहियो केॅ
बान्हे लेॅ चाहै जों तोरोॅ बेटा
तेॅ कैन्हें नी उधियैबौं तोहें
आरों कैन्हें नी बांध, बराज दहैबौ तोहें
हेनोॅ कांही नै सुनलेॅ छियै
कि आपनोॅ सुक्खोॅ लेॅ
कोय बेटा माय केॅ बान्ही केॅ ओकरोॅ लोर पियै
आरो जबेॅ-जबेॅ हेनोॅ होलोॅ छै
भांगटोॅ लागलोॅ छै
बाँधोॅ सें बीस पचास
आपनोॅ सुख छानै छै
बाकी लाखों-लाख आपनोॅ दुक्खोॅ पर कानै छै ।