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कहा पिताजी ने / सुशान्त सुप्रिय

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जब मैं नहीं रहूँगा
तब भी हूँगा मैं --
कहा पिताजी ने

जिऊँगा बड़के की
क़लम में
कविता-कहानी बन कर

बिटिया की कूची
और पेंटिंग्स में
ज़िंदा रहूँगा मैं

जीवित रहूँगा मैं
मँझले के
आत्म-सम्मान में

छोटे के
संकल्प में
जिऊँगा मैं

जैसे मेरे पिता जीवित हैं मुझमें
और अपने बच्चों में जिओगे तुम सब
वैसे ही बचा रहूँगा
मैं भी तुम सब में
ओ मेरे बच्चो--
कहा पिताजी ने हम से