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कोरोना-2 / संतोष श्रीवास्तव

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वह इसी कोशिश में है
कि जैसे ही लापरवाह हों
वह घुस आए घर में
बिन बुलाए मेहमान-सा

इस वक़्त वह
बड़े आनंद में है
सब उसी का चिंतन - मनन
कर रहे हैं
मीडिया पर दिन-रात
उसी की खबरें हैं

वह बिना राजपाट के
पूरी दुनिया का सरताज है
सबकी ज़ुबान पर वह
सब की दिनचर्या में वह
उसकी हिटलरी हुकूमत
टिक पाएगी अधिक दिन ?
लोगों में दूरियाँ बनाकर
वह औरंगजेबी फरमान
जारी कर पाएगा ?
कि प्रेम को गाड़ दो
गहरे गड्ढे में

जनाब कोरोना
तुम्हें मुंह की खानी ही पड़ेगी
मिट जाओगे तुम
नामो निशां नहीं रहेगा तुम्हारा
अभी तुम जानते कहाँ हो
प्रेम की शक्ति