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गीत ऐसा लिखूँ / नवीन कुमार सिंह

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चेतना स्वर बने ऐसी झनकार दे
गीत ऐसा लिखूँ मेरी माँ शारदे

राम के हो भजन, गान सीता के हों
धर्म हो बुद्ध का, ज्ञान गीता के हों

वेदमन्त्रों का इनमें सहज सार दे
गीत ऐसा लिखूँ मेरी माँ शारदे

मैं भी मीरा की तरह, तुझे भज सकूँ
लोभ को छोड़ दूं, मोह को तज सकूँ

रामकृषण के जैसी तू तलवार दे
गीत ऐसा लिखूँ मेरी माँ शारदे

पथ हो सन्मार्ग का, भावना हो सबल
योग तेरा समर्पण से मेरे प्रबल

सर्व कल्याण का मंत्र उच्चार दे
गीत ऐसा लिखूँ मेरी माँ शारदे