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ज़रूरत / केशव
Kavita Kosh से
शिखरों पर उड़ते हैं बादल
ऊपर
और ऊपर
और धरती पर भी अक्सर
शिखरों को कर लें
ओट बेशक
धरती की अभी
ज़रूरत जै
बहुतों की