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दीठाव रै बेजां मांय / तेजसिंह जोधा

Kavita Kosh से
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दो पग
दाब्यां जावै है रग-रग
आं ध्वनि-बिहूण गतां रै बिचै सूं
लगोलग
लगोलग
नैड़ी, नैड़ी, नैड़ी आवतोड़ी थूं
पेट री लाय भुगतै मां
म्हैं जीवण री जुगत जोडूं

औ डील
तर-तर सूंतीजतो डील
अै हाथ
तर-तर छाती पर आता हाथ
अेक धूज
घांटी
खुद रै ई बोझ सूं पड़तोड़ी
अै आंख्यां
कठैई सैंचन्नण में चिमकी लेतोड़ी

अेक लखांण
कै अळगै तांई आगै-लारै मां
अेक लखांण
कै अळगै तांई अेड़ै-छेड़ै मां
अेक लखांण
कै अळगै तांईं ऊपर-नीचै मां
अेक लखांण

कै ऊठतां मां
कै पड़तां-आखड़तां मां-मां
थूं दीठाव सूं बेजां बारै ही
म्हैं दीठाव रै बेजां मांय हौ।

मां।
म्हैं थनै सांभी हूं मां
घणी-घणी वार
किणी ढाळ में सुर री आंट
कै जठै, सै कीं तिसळ्यो-तिसळ्यो
कै संभ ज्यावै
मूंडै री उण मरोड़, जिकी रोवण सूं पैली आवै
आंगळीरी आंख रै उण उनमान
जिको पगां ल्यावै
म्हैं थनै पैरी ओढी हूं मां
केई-केई बार
जीयां कै सीयाळै टाबर
फूलालैण रै अस्तर आळी गूगी
हाथ-पगां रा मोजा
अंवेरी हूं थनैं
जीयां के टाबरपणै काच रा कंडा
झींटियै री बात
बधर्योड़ी चूड़्यां, बिलिया अर पांखां
बस मां
औ कीं पैरणो ओढणो
सांभणो-अंवेरणो ई तौ म्हारै सारै हौ
थूं दीठाव सूं बेजां बारै ही
म्हैं दीठाव रै बेजां मांय हौ।

मां।
वो कैड़ो सपनो हौ मां
कै जिको थनै, ढळती रात रा लड़गो
तद, जद म्हैं गरभ हौ
अेक अटपटाटी रै मांय तै व्हैतोड़ो
मां।
की अैड़ो ई तौ हौ वो सपनो
कै जिणरो जिकर
थूं निरा दिन पछै तांई करती री
सपनो कै जिण में
अबखी रिंद-रोह्यां लागयोड़ी लाय
थूं म्हनैं ऊंचायां, घींसती भागती जाय
थारो ओ असपनो
मां।
म्हारो सांच हौ
थूं दीठाव सूं बेजां बारै ही
म्हैं दीठाव रै बेजां मांय हौ।

मां।
स्टैªप्टोमाइसिन रा इंजेक्शन
अेकानी मेल दै मां, अर भरोसो राख
कै म्हैं अब सिगरेट नीं पीवूंला
थारा सीवणै री मसीन पर चालता वां पगां री सोगन
जिकां री सोजन
म्हैं सासती
म्हारी पलकां माथै अंगेजतो रह्यो हूं
पण बात वा ई है मां
थूं दीठाव सूं बेजां बारै है
म्हैं दीठाव रै बैजा मांय हूं

थूं पेट री लाय भूगतै
म्हैं
जीवण री जुगत जोडूं-
साव वीयां रौ वीयां
थनै च्यारूंमेर सूं खिंवण नै खपतो
जीयां कै जलम तांई थूं
म्हनै भै अर बिसमै रै बिचै खिंवण नै मिळी
अर म्हैं, म्हारै में
कान, नाक, आंख, जीभ अर चामड़ी री गत लखी

मां।
थूं दीठाव सूं बेजां बारै ही
म्हैं दीठाब रै बेजां मांय हौ।