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नई कहबा योग्य गप्प / राजकमल चौधरी

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एकटाँ आदति, जे पाछ आत्महत्या बनि गेल
धुआँक लहरि सन कुरूप हँसी ककरो
पहिने मात्र घृणा बनल, फेर बनि गेल अनिवार्य आवश्यकता
इच्छा भित्ति-परिवर्त्तन
किरानीगिरीसँ महासेठ हेबाक स्वप्न
भय, आतंक अंग-अंगमे विराट ठेही
अज्ञात नगरक ऋजु-आयत एकान्त रस्ता आ साँझ
दउगइत, चिचिआइत आयलि, एकटा नारी
पाछाँ-पाछाँ हमरा, बड़ी दूर धरि
अन्हारमे टगइत, थर-थर करइत
मुदा, किअए? की लाभ??
जल-प्रवाहक प्रचण्ड गति, उबडुब करइत पुरुख
घाट पर बेहोस, नँगटे पड़लि नारी
-सभ मिझाइत सूर्यकिरण धरय चाहइ छथि
सभ इजोत माँगइ छथि
प्रेम, शान्ति, जिनगीक लेल कानइ छथि
हे बन्धु, नइँ बाजू ओकर नाम, जकरासँ कएलउँ प्रेम
नइँ बाजू ओकर नाम, जकरासँ भेटल शान्ति
नइँ बाजू ओकर नाम, जे छल अहाँक जिनगी
चुप्पे रहि जाउ, चुप्पे रहि बिसरि जाउ
भाँग पीबि, उजड़ल दलानमे सूति रहू
अनावृता
ने देह पर ने मोन पर कत्तउ कोनो वस्त्र
लज्जाक आवरणो नइँ चेहरा पर
अन्हार रास्ता पर चिकरइए एकटा नारी-
हमरा कीनि लिअ
फाटल कोट जकाँ टाँगि दिअ देबाल पर
हमरा पहिरू जुनि
मुदा, हमरा कीनि लिअ
हम भूखल छी, प्यासल छी, छी बेमार
यमक हाथसँ हमरा छीनि लिअ