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पूर्ण विराम / सपन सारन

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ओझल हुआ ख़ास
उम्र हुई उदास
हंसी का बढ़ा दाम
अब पूर्ण विराम ।

पंछी बोले शोर
चुभने लगा भोर
नियति का है काम
हो दान, पूर्ण विराम ।

दर्द की है धुन
कर्म रहा सुन
जाऊँ,कौनो धाम
जहाँ, पूर्ण विराम ।