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माय भवानी मोरी पाहुनी हो मा / बुन्देली

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   ♦   रचनाकार: अज्ञात

माय भवानी मोरी पाहुनी हो मां।
चन्दन पटली बैठक डारों,
दूधा पखारों दोऊ पांव। भवानी...
दार दरों मैं मूंग की माता,
राधौं मुठी भर भात। भवानी...
खाके जूंठ मैया अचवन लागीं,
मुख भर देतीं असीस। भवानी...
दूध पूत मैया तोरे दये हैं,
बरुआ अमर हो जायें। भवानी...
सुमिर-सुमिर मैया तोरे जस गाऊं,
चरण छोड़ कहां जाऊं। भवानी...