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हरे रामा रक्षा करो यदुवीर (कजली) / आर्त

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हरे रामा रक्षा करो यदुवीर इन्द्र उधिराने रे हारी ।।

सावन सस्य श्याम वसुधा चहै उमडि घुमडि घन बरसै रामा
हरे रामा तब भये सूरज सयाने धान मुरझाने रे हारी ।।1।।

भादों भरैं ताल पोखर तेहि राज सकल जग सूखा रामा
हरे रामा रोवैं गरीब किसान राम रिसियाने रे हारी ।।2।।

क्वार कड कि कै का करिहैं जब कुहुँकि जाये किसनइया रामा
हरे रामा चुनिगै चिरइया खेत तौ का पछिताने रे हारी ।।3।।

बूढ भयो कीधौं मनमोहन नहिं सूझै जगत विपतिया रामा
हरे रामा सोवौ जशोदा कै पूत पीताम्बर ताने रे हारी ।।4।।

देखि अनीति अधीर 'आर्त' से जौ सुरपति कतहुँ भेटाने रामा
हरे रामा लाठिन फोरि कपार निपटि लेब थाने रे हारी ।।5।।