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`ट्राईबल´ में स्की-फेस्टिवल / अजेय

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सन सन सर्र सर्र
बर्फ पर
चटख झंडे
लाल पीले नीले
मजेन्टा और पर्पल और फलॉरेसेन्ट बच्चे
पाऊडर स्कीईंग
वाह जी वाह!
अभी कल ही तो पड़ी है
पाँच-छह फुट समझो
इस बार तो
कुल मिलाकर
गाँव में बड़ी मस्ती है
उम्मीदें जगी है
बुजुर्गों ने कहा है बच जाएंगी फसलें ।

बड़ा महंगा होगा
नही शर्मा जी,
यह `इकुपमिंट´?
इंपोर्टिड...
अच्छा, `स्मगल्ड´ है ?
वाह जी वाह!

मनाली वाले हैं
दो चार `इंस्ट्रक्टर´
कुछ `फोर्नर´
ये `फोर्नर´ भी बस ...
और ये छोकरू अपने
उनके पीछे-पीछे ।
वैसे एक बात कहूं सर,
यह एडवेंचर
और मस्ती-
स्वस्थ मनोरंजन है
`टॉनिक´ कहो `...काइंड आफ´ ।
वही तो,
हमारे ऋषि मुनि
क्या करते थे दुर्गम कन्दराओं में?

एडवेंचर तो
`हेल्दी थिंकिंग डिवलेप´ करता है जनाब ।
`एक्ज़ेक्टली सर !`
और कैसे पीके `गच्च´ रहते हैं
यहाँ के लोग
पिछली बार याद है
कितना नाचे थे
कपूर साब
रात भर `छंका`...
और कैसी प्यारी-प्यारी लड़कियाँ आई थीं
दारचा से
वाह जी वाह!
गिल साब का भांगडा
जगह नहीं थी
हाँल में तिल धरने को ।

मैंने तो डी´स्साब से कहा
यह रौनक मेला लगे रहना चाहिए
ट्राईबल में
और क्या है
टाईम पास ।
हाँ जी, हाँ ।´