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अँगना में चकमक, कोहबर अँन्हार / मगही

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मगही लोकगीत   ♦   रचनाकार: अज्ञात

अँगना में चकमक, कोहबर अँन्हार[1]
नेसि[2] देहु दियरा[3] होयतो[4] इँजोर गे माइ॥1॥
पान अइसन पतरी, सुहाग बाढ़ो[5] तोर।
साटन[6] के अँगिया समाय[7] नहीं कोर[8] गे माइ॥2॥
केंचुआ[9] के चोरवा भइया, देहु न बँधाय।
रउदा[10] में बाँधल भइया, रहतन रउदाय[11]
अँचरो में बाँधब भइया रहतन लोभाय॥3॥

शब्दार्थ
  1. अँधेरा
  2. जला दो
  3. दीपक
  4. हो जायेगा
  5. बढ़े
  6. एक बढ़िया रेशमी कपड़ा
  7. अँटता नहीं है
  8. गोद, यहाँ छाती से तात्पर्य है
  9. कंचुकी
  10. धूप
  11. धूप से व्याकुल