भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

अंगिका फेकड़ा / भाग - 2

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

ओ-रे रे नूनू ओर बटना
माय बाप गेलोॅ छौ चिचोर कटना
बाप जिमिदरबा घोड़वा पर
माय जिमिदरनी डोलवा पर
पैला में चूड़ा मचक मारै छै
सीका पर दही हिलोड़ मारै छै।


नूनू के जुठ-कुट के खाय?
बाबू खाय।
बाबू के जुट-कूट के खाय?
भैया खाय।
भैया के जुठ-कूट के खाय?
भौजी खाय।
भौजी के जुठ-कूठ के खाय?
कुतवा खाय।
कुतवा के जुठ-कुठ के खाय?
कौआ खाय।
कौआ के जुठ-कुठ के खाय?
धरती खाय।


ओ-रे रे नूनू ओर बटना
माय गेल छौं कूटेॅ पीसेॅ
बाप गाड़ीमान
दादा गेलोॅ छौं बाँस काटेॅ
दादी हलुमान
फूफू तेॅ छेकौ लुबड़ी
पानी पियै के तुमड़ी
साँझै घूरी केॅ एथौं नूनू
भर अैंगना।


चॉन मामू आरे याबोॅ वारे याबोॅ
नदिया किनारे आवोॅ
चंपा केला, सुरका चूड़ा
भैंसी के दही
लेलेॅ आवोॅ, लेलेॅ आवोॅ
नूनू रोॅ मुँहोॅ में घुटुस।


सूतें-सूतें रे नूनू ओर बटना
माय गेलै कूटेॅ पीसेॅ, बाप खलिहान
चाचा गेलै छप्पर छारेॅ
चाची के दुखैली कान।


सूतेॅ-सूतेॅ रे नूनू सुतौनी देबौ
दाल-भात तोहरा खबौनी देबौ।