भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

अंगिका फेकड़ा / भाग - 6

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज


बाबू हो भैया हो
सुग्गा फोकै छौं धान हो
केॅ मोॅन?
बीस मोॅन।
बीसू राय के बेटवा
लाल पगड़िया मॅथवा
ढोल बाजे डिग्गिर बाजे
बाजे रे शहनैया
राजा बेटी धरहर नाँचै
रतन जमइया।


चल गे चिलरोॅ मोर खलिहान
खोयछा भरी देबौ रामसारी धान
वही धान के कुटिहें चूड़ा
नेतोॅ जमैहिएं कोॅर-कुटुम
सब्भै तोरा दिएॅ आशीष
चिरयुग जिऐ नूनू, लाख बरिस।


हा हुस रे पर्वत सुगा
हमरोॅ खेत नै जैहियैं सुगा
मामू खेत जैहियैं सुगा
एक्के सीसोॅ लीहें सुगा
घोंघा में भात रान्हियें
सितुआ में माँड़ पसैहियें सुगा
आपनें खैइहैं दाल-भात
बेटा-बेटी केॅ खिलैयैं माँड़-भात
आपनें सुतिहें मचोल पर
बेटा-बेटी केॅ सुतैहियैं डमखोल पर।


बिल्लो मौसी कहाँ जाय छैं?
माछोॅ मारेॅ।
केना मारबे?
छुपुर छैंया।
केना बनैवे?
हसुआ-कचिया।
केना धाबे?
कठौती पानी।
केना खैबे?
कुटुर-मुटुर।
केना सुतबे?
नम्मा चौड़ा।
केना सतभेॅ?
फों-फों-फों।