भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

अंतर मैं बासी / घनानंद

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

अंतर मैं बसी पै प्रवासी कैसो अंतर है,
                  मेरी न सुनत दैया ! आपनीयौ ना कहौ.
लोचननि तारे ह्वै सुझायो सब,सूझी नाहीं,
                  बुझि न परति ऐसी सोचनि कहा दहौ.
हौ तौ जानराय,जाने जाहु न अजान यातें,
                  आँनंद के घन छाया छाय उघरे रहौ .
मूरति मया की हा हा! सूरति दिखैऐ नेकु,
                 हमैं खोय या बिधि हो!कौन धी लहालहौ.