भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

अंधेरा और रोशनी-4 / गिरिराज किराडू

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

पृथ्वी ने देखा सूरज पर अंधेरा है
पृथ्वी ने देखा चांद पर अंधेरा है
और वह इस तरह रोने लगी जैसे रोने लगी थी साथ काम करने वाली वह लड़की
जिसके अपमान में नहीं, रोने में तुम्हारी छवि नही,तुम्हार रोना झाँकता हुआ
पाकर इस्तीफ़ा दे दिया था मैंने ।