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अंबे तो खबं बळे रे दिवला / मालवी

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   ♦   रचनाकार: अज्ञात

अंबे तो खबं बळे रे दिवला
जाणू चतुरभुज जनमियां
जुग-जुग जिवजो दाई हमारा
आतो-सो दीनड़ झेलियो
जुग-जुग जीवजो सासू हमारा
दस दन कुंवर खेलाविया
जुग-जुग जीवजो जेठाणी हमारा
चखेत फूंको मेलियो
जुग-जुग जीवजो देराणी हमारा
कंवळे खाट बिछाविया
जुग-जुग जीवजो नणांद हमारा
कूका ने झगल्यो लाविया
कूका ने झूल टोपी लाविया
जुग जुग जीवजो ढ़ोली हमारा
अंगणा में ढ़ोल घोराविया
जुग जुग जीवजो पड़ोसण हमारा
दस दन मंगल गाविया
जुग जुग जोशी हमारा
कूका को नाम धराविया।