भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

अछूत की तलवार / बाल गंगाधर 'बागी'

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

मनु की साजिश से इंसान जब फना होगा
फिर दहकता शोला, मेरे दर्द से बयां होगा
जुल्म की साजिश पे, काफिला चलेगा जब
हवा का रूख बदलेगा, जिधर धुआं होगा
नई-नई उम्मीद और नया चि़राग जलाओ
अब मनुवादियों का झंडा न यहाँ होगा
फिर मनुवाद अब आबाद यहाँ होगा अगर
मेरे मशाल से जलकर के वह भुना होगा
गैर इंसानी आवाज़ अगर निकलेगी फिर
बाग़ी जंग अछूत की तलवारों से बयां होगा