भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
  रंगोली
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार
Roman

अजब अपार परिपूर्ण छै प्रताप लै केॅ / अनिल शंकर झा

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

अजब अपार परिपूर्ण छै प्रताप लै केॅ
एक-एक कण में भी शक्ति केॅ समैनेॅ छै।
भुखला केॅ अन्न आ बसन दै छै नगटा केॅ
जीवन सें हारला केॅ मरै सें बचैने छै।
राजा-रंक साधु-गुनी अगुनी-असाधु केॅ भी
एक रं मानी सब गला सें लगैनें छै।
आदि की अनादिहै सें कीरती सुहाबै सब
बलि-बलि जाबै जान कतना लुटैनें छै॥