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अजी केले से आवै हमें बांस / हरियाणवी

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अजी केले से आवै हमें बांस, महल केला किन बोया
मुक्के मारूं पचास, धक्के देऊन डेढ़ सौ
गोरी महलों से करूंगा जवाब, चली जाओ बाप के
गोरी महलों से दूंगा निकाल, महल केला हम बोया
मेरे बीरा बाढ़ी के, गड्डी गढ़ला बाजनी
हमारे राजा ने दिया है जवाब, चली जाओ बाप के
गोरी नै एक बन लांघा, दूजा बन लांघा
तीजे में हुए नंदलाल, विपत में सम्पत भई
काहे का करूं ओढ़ना, काहे का करूं बिछावना
ए जी काहे की पिलाऊं रस घुट्टी, विपत में सम्पत भई
इतनी तो सुनि कै सासू आई, बहू घर चलो
सासड़ मुड़ तुड़ लगूं थारे पांय, पोता तो दूंगी गोद में
इतनी तो सुन कै जिठानी आई, बहू घर चलो
जिठानी मुड़ तुड़ लगूं थारे पैर, बेटा दूंगी गोद में
इतनी सी सुन कै नन्दल आई, भाभी रानी घर चलो
बीबी मुड़ तुड़ लगूं तेरे पैर, भतीजा दूंगी गोद में
इतना तो सुनि कै राजा भी आये, प्यारी घर चलो
राजा जी तुम ने दिया है जवाब, जाओ घर बाप के
पिया से रूठे गोरी ना सरै, ना सरै गोरी बाप के
प्यारी मुड़ तुड़ लगूं थारे पैर, हमारी रानी घर चलो