भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
  काव्य मोती
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

अटकी पीरे पटवारे सैं / ईसुरी

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

अटकी पीरे पटवारे सैं।
प्रीत पिया प्यारे सैं।
निसदिन रात दरस की आसा,
लगी पौर व्दारे सैं।
कैसे, प्रीत बड़े भय छूटैं,
संग खेली बारे सैं।
विसरत नई भोत बिसराई,
बसीं दृगन तारे सैं।
ईसुर कात मिलैं मन मोहन,
पूरव तन गारे सैं।