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अधिकार / एक धरती है एक है गगन

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रचनाकार: नीलकंठ तिवारी                 

एक धरती है एक है गगन
एक मन मेरा एक है लगन, ओ सजन

जितने अम्बर में हैं तारे
साजन मेरे संग जितने न्यारे
ओ... मेरे नैनों में उतने खिले सपन, ओ सजन
एक धरती है एक है गगन
एक मन मेरा एक है लगन, ओ सजन

ओ... चन्दा तोरी मैं हूँ चकोरी
जनम-जनम का नाता
प्यार हमारा रोज़ गगन में
तारों के दीप जलाता
ओ... इन तारों में चमके मन की अगन, ओ सजन
एक धरती है एक है गगन
एक मन मेरा एक है लगन, ओ सजन

चाहे टूटे जीवन वीणा
चाहे टूटे तार पिया
लेकिन कभी न टूटे मन की
मधुर-मधुर झनकार पिया
ओ... पिया छूटे न अपना ये बन्धन, ओ सजन
एक धरती है एक है गगन
एक मन मेरा एक है लगन, ओ सजन