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अधूरा प्रेम / कुंदन सिद्धार्थ
Kavita Kosh से
एक दिन
मैं नहीं रहूँगा
एक दिन
तुम खो जाओगे
बचा रह जायेगा प्रेम
जो हम कर नहीं पाये
अधूरा छूट गया प्रेम
प्रतीक्षा करेगा पूरे धैर्य के साथ
फिर से हमारे धरती पर लौटने की
अधूरा छूट गया प्रेम
भटकेगा इस सुनसान में
उसकी आत्मा जो अतृप्त रह गयी
मैं आऊँगा रूप बदलकर
तुम भी आना
हम करेंगे प्रेम जी भर के
अधूरा जो छूट जाता है
पीछा करता है जन्मों-जन्मों
तुम्हीं ने कहा था
बरसों पहले