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अनिन्द्य सौन्दर्य / हरिवंश राय बच्चन / विलियम बटलर येट्स

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ओ, बादल-सी पीली पलकें,
                 स्वप्न गगन-सी नीली आँखें !
अपने छन्दों में अनिन्द्य सौन्दर्य
                                 मूर्त करने की धुन में
काम रात-दिन करनेवाले कविगण
सहज पराजित होते
नारी की चितवन से,
नभ में निष्प्रयास चलते उडगण से ।
इसीलिए मेरा अभ्यन्तर झुका रहेगा
                    प्रभु के द्वारे काल-क्षय तक,
क्योंकि ओस की बून्दें तन्द्रिल टपक रही हैं
निष्प्रयास चलते तारों के आगे
                        और तुम्हारे आगे ।

मूल अँग्रेज़ी से हरिवंश राय बच्चन द्वारा अनूदित

लीजिए अब पढ़िए यही कविता मूल अँग्रेज़ी में
              William Butler Yeats
      Aedh Tells of the Perfect Beauty

O cloud-pale eyelids, dream-dimmed eyes,
The poets labouring all their days
To build a perfect beauty in rhyme
Are overthrown by a woman’s gaze
And by the unlabouring brood of the skies:
And therefore my heart will bow, when dew
Is dropping sleep, until God burn time,
Before the unlabouring stars and you.