भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

अनुगुंजन / कविता भट्ट

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज


12
नहीं विलग
तुम से उद्भाषित
रमी तुममें
13
न कोई धर्म
है सदैव पूजित
निष्काम कर्म
14
अनुगुंजन-
सृष्टि नित करती
हरि पूजन
15
गिरि उन्मुख
नित चुम्बन करें
नभ के मुख
16
हास जगाती
प्रकृति विदूषिका
मन रमाती
17
तुम संगीत
मैं लयबद्ध गीत
ओ मनमीत !
18
है सुरापान-
अधर- प्याली पर
धरे चुम्बन .
19
कभी तो झुको
अन्यथा टूटोगे ही
तुम्हें गर्व क्यों
20
नम्र धरा सी
ओ रवि तेरा नित
परिभ्रमण
21
चहुँ दिशि में
गाये-मुस्काये नित
प्रेम विजित
22
सपने बाँचू
नित प्रेम से लिखी
पाती मन की