Last modified on 13 जनवरी 2008, at 18:39

अनुपात / सुधीर सक्सेना




ज़िन्दगी

ज़िन्दगी है

अगर है वहाँ ढेर सारा क्षार ।


मगर,

क्या कहना ज़िन्दगी का,

अगर वहाँ हो ढेर सारा क्षार

और थोड़ा-सा तेज़ाब ।