जब फूल नहीं खिला था,
तब भी वह खिला था
जब खिला है वह
तो खिल उठी हैं दिशाएँ!
देखो!
सूर्य एक कविता लिख रहा है
नहीं, सूर्य कविता हो रहा है।
फूल स्वयं सूर्य हो रहा है
और सूर्य
फूल-सा कोमल और सुगंधमय!
किस-किस तरह कौन
क्या-क्या हो रहा है!
हवा सुगन्ध की संगत में
यह कौन-सा राग
गा रही है?