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अप्प दीपो भव / तथागत बुद्ध 1 / कुमार रवींद्र

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बुद्ध लौट आये जीवन की ओर

गुफा बड़ी लम्बी थी मृत्यु की-
उसमें वे भटके थे
अंधा था एक कुआँ दुक्ख का
जिसमें वे अटके थे

वहीं मिला था उनको जीवन का छोर

गौतम थे-
तम से थे घिरे रहे-
सूर्य हुए
उतर गये पल भर में
कंधों पर लदे हुए सभी जुए

छँटे सभी अँधियारे-हुई नई भोर

देह के परे वे आकाश हुए
छूटीं इच्छाएँ भी
करुणा से भीगे वे
साँसों में उमड़ी नेहिल धाराएँ भी

होकर सिद्धार्थ भरी मन की हर कोर