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अप्प दीपो भव / यशोधरा 3 / कुमार रवींद्र

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पूरा दिन खाली-सा
बीत गया आँखों-ही-आँखों में
            चिंतित है यशोधरा

कोई संदेश नहीं
पिता-पुत्र दोनों का
सूख गया जल
उसकी आँखों के कोनों का

कबकी है
दिये जला गई चेरि ताखों में
             चिंतित है यशोधरा

एक रात पहले की
एक रात आज की
हो गई कपोती वह -
चोंच फँसी बाज की

घटाटोप गहरा
सन्नाटा है बरगद की शाखों में
              चिंतित है यशोधरा

रात-ढले कल
अगला सूरज जब आयेगा
जाने क्या समाचार
सँग अपने लायेगा

बिंधी रहेगी
तब तक वह जली सलाखों में
              चिंतित है यशोधरा