भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

अबरी के बार बकस मोरे साहेब / दरिया साहेब

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

अबरी के बार बकस मोरे साहेब। जनम-जनम कै चेरि हे।।
चरन कमल मैं हृदय लगाइब। कपट कागज सब फाड़ि हे।।
मैं अबला किछुओ नहीं जानौं। परपंचन के साथ हे।।
पिया मिलन बेरी इन्ह मोरा रोकल। तब जीव भयल अनाथ हे।।
जब दिल में हम निहचे जानल। सूझि परल हम फंद हे।।
खूलल दृष्टि दिया मनि लेसल। मानहुँ सरद के चंद हे।।
कह दरिया दरसन सुख उपजल। दुख-सुख दूरि बहाय हे।।