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अब,क्या है कहना / भावना कुँअर

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नीला आकाश
आया काला बादल
जैसे ही देखा
चुप हुई कोयल
बैठी थी भूल
वो मधुरिम गान ।
आ गई तभी
बादलों को चीरती
नन्ही किरण
कोयल का हौसला
लौटके आया
खूब थी छेड़ी
फिर उसने तान।
बादल काला
अब हुआ हैरान।
दौड़के आई
सूरज की बहना
वायु का बस
अब,क्या है कहना।
उठा बादल
घाटी में फेंक आई।
पलभर में
चमचम करती
रोशनी खिल आई।