भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
  रंगोली
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार
Roman

अब किसी शैतान से डरना नहीं है / मधुर शास्त्री

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

यह कविता अधूरी है, अगर आपके पास हो तो कृपया इसे पूरा करें

जग उठा है देवता का बल हमारा
अब किसी शैतान से डरना नहीं है

वे हमीं हैं शून्य रेखा में सदा नवरंग भरते
जन्म लेते तारकों को एक हम ही सूर्य करते
हम नहीं इतिहास का हर वाक्य कहता है कहानी
हम जहाँ रखते कदम वहाँ गाथा लिखती है जवानी

सत्य की पतवार अपने हाथ में
जब फिर किसी तूफान से डरना नहीं है
जग उठा है देवता का बल हमारा
अब किसी शैतान से डरना नहीं है