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अब के बरस भी / फ़राज़

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लब[1] तिश्न-ओ-नोमीद[2] हैं हम अब के बरस भी
ऐ ठहरे हुए अब्रे-करम[3] अब के बरस भी

कुछ भी हो गुलिस्ताँ[4] में मगर कुंजे- चमन [5] में
हैं दूर बहारों के क़दम अब के बरस भी

ऐ शेख़-करम[6]! देख कि बा-वस्फ़े-चराग़ाँ[7]
तीरा[8] है दरो-बामे-हरम[9] अब के बरस भी

ऐ दिले-ज़दगान[10] मना ख़ैर, हैं नाज़ाँ[11]
पिंदारे-ख़ुदाई[12] पे सनम[13] अब के बरस भी

पहले भी क़यामत[14] थी सितमकारी-ए-अय्याम[15]
हैं कुश्त-ए-ग़म [16] कुश्त-ए-ग़म अब के बरस भी

लहराएँगे होंठों पे दिखावे के तबस्सुम[17]
होगा ये नज़ारा[18] कोई दम[19] अब के बरस भी
 
हो जाएगा हर ज़ख़्मे-कुहन [20] फिर से नुमायाँ[21]
रोएगा लहू दीद-ए-नम[22] अबके बरस भी

पहले की तरह होंगे तही[23] जामे-सिफ़ाली[24]
छलकेगा हर इक साग़रे-जम[25] अब के बरस भी

मक़्तल[26] में नज़र आएँगे पा-बस्त-ए-ज़ंजीर[27]
अहले-ज़रे-अहले-क़लम[28] अब के बरस भी

शब्दार्थ
  1. होंठ
  2. प्यासा और निराश
  3. दया के बादल
  4. उद्यान
  5. उद्यान के कोने में
  6. ईश्वर
  7. बावजूद
  8. अँधेरा
  9. काबे के द्वार व छत
  10. आहत हृदय
  11. गर्वान्वित
  12. ईश्वरीय गर्व
  13. मूर्तियाँ
  14. प्रलय, मुसीबत
  15. समय का अत्याचार
  16. दुख के मारे हुए
  17. मुस्कुराहटें
  18. दृश्य
  19. कुछ समय
  20. गहरा घाव
  21. सामने आएगा
  22. भीगे नेत्र
  23. ख़ाली
  24. मिट्टी के मद्य-पात्र
  25. जमशेद नामी जादूगर का मद्यपात्र
  26. वध-स्थल
  27. बेड़ियों में जकड़े पैर
  28. विद्वान व लेखक