भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
  काव्य मोती
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

अब के बरस भेज भईया को बाबुल / शैलेन्द्र

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

अब के बरस भेज भईया को बाबुल सावन में लीजो बुलाय रे !
लौटेंगी जब मेरे बचपन की सखियाँ दीजो संदेशा पठाय रे !

बैरन जवानी ने छीने खिलौने और मेरी गुड़िया चुराई
बाबुल मैं थी तेरे नाज़ों की पाली फिर क्यों हुई मैं पराई
बीते रे जुग कोई चिठिया न पाती, न कोई नैहर से आए रे !

अम्बुवा तले फिर से झूले पड़ेंगे रिमझिम पड़ेंगी फुहारें
लौटेंगी फिर तेरे आंगन में बाबुल सावन की ठंडी बहारें
छलके नयन मोरा, कसके रे जियरा, बचपन की जब याद आए रे !

यह गीत शैलेन्द्र ने फ़िल्म 'बंदिनी' के लिए लिखा था ।