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अब चाहे गोली हो, सूली, सलीब हो / शिवशंकर मिश्र

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अब चाहे गोली हो, सूली, सलीब हो
इतना भी कोई जो दिल से करीब हो
कौन उसे मारेगा, मर जाएगा वह?
मौत जब उस की चाहत का नसीब हो?