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अब तसव्वुर में हक़ीक़त को भी लाना शामिल / रवि सिन्हा

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अब तसव्वुर[1] में हक़ीक़त को भी लाना शामिल
अब म’आनी में है नग़्मों का तराना शामिल 

बे-नियाज़ी[2] में तमन्ना भी कोई कौंध उठे 
नागहानी[3] में कभी आप का आना शामिल

काम जो हुस्ने-तग़ाफ़ुल[4] ने दिए हैं उनमें 
बारहा बर्फ़ में आतिश को जगाना शामिल

चार दीवारे-अनासिर[5] में भी ज़ाती[6] क्या है 
जिस्म से रूह के रिश्ते में ज़माना शामिल

ख़ल्क़े-आग़ाज़[7] ने दीवारे-ख़ला[8] पे टाँगी 
कारे-दुनिया[9] में वो तसवीर हटाना शामिल

गरचे तहज़ीब उगी दामने-क़ुदरत ख़ुद ही  
अब ज़राअत[10] में हो दहक़ाँ[11] भी उगाना शामिल

नक़्शे-पा[12] वक़्त की इस रेत पे क्या छोड़ेंगें 
अपनी फ़ितरत[13] में महज़ ख़ाक उड़ाना शामिल

इन ख़तीबों[14] में कहाँ क़ुव्वते-गोयाई[15] है 
अब क़वाइद[16] में हो जिद्दत[17] को बुलाना शामिल

जा के पीरी[18] में जो तख़्लीक़[19] की हसरत जागी
हर नई बात में मज़मून पुराना शामिल 

शब्दार्थ
  1. कल्पना (imagination)
  2. निस्पृहता (indifference)
  3. आकस्मिकता (accidental)
  4. उपेक्षा (neglect)
  5. पंचतत्त्व (elements)
  6. निजी ( private)
  7. शुरुआती मनुष्यता (primitive humanity)
  8. शून्य / अन्तरिक्ष की दीवार (wall of
    nothingness/space)
  9. दुनिया के काम (works of the world)
  10. खेती (agriculture)
  11. किसान (peasants)
  12. पाँव के निशान (footprints)
  13. स्वभाव (nature)
  14. भाषण-कर्त्ता (orator)
  15. अभिव्यक्ति की क्षमता (capacity to express)
  16. नियम, व्याकरण (rules, grammar)
  17. नयापन,अविष्कार (innovation)
  18. बुढ़ापा (old age)
  19. सृजन (creation)