भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
  काव्य मोती
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

अब न रहा जीवन-घट रीता / श्यामनन्दन किशोर

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

अब न रहा जीवन-घट रीता।

सरित प्यार का हर सीकर है।
रस-अथाह मेरा अन्तर है।

जलन-तपन की ऋतु लो बीती,
प्यास-भरा वह दुर्दिन बीता!

भला न लगता जग को हँसना।
और, किसी दो दिल का बसना।

पर मैंने तो दुर्बलता से
ही दुनिया के मन को जीता!

(12.5.54)