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अब मैं कौन उपाय करूँ / नानकदेव

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अब मैं कौन उपाय करूँ॥

जेहि बिधि मनको संसय छूटै, भव-निधि पार करूँ।
जनम पाय कछु भलौ न कीन्हों, तातें अधिक डरूँ॥

गुरुमत सुन कछु ग्यान न उपजौ, पसुवत उदर भरूँ।
कह नानक, प्रभु बिरद पिछानौ, तब हौं पतित तरूँ॥