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अब हमें ग़म को भुलाना आ गया / रंजना वर्मा

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अब हमें गम को भुलाना आ गया।
अश्क़ पी कर मुस्कुराना आ गया॥

जब दुखी थे तब अकेले ही रहे
साथ अब सारा जमाना आ गया॥

तैरना आता नहीं मझधार में
जब पड़े चप्पू चलाना आ गया॥

साथ देते सब सदा धनवान का
रंक से पीछा छुड़ाना आ गया॥

डगमगाती कश्तियाँ तूफ़ान में
पार है हमको लगाना आ गया॥

झूठ कह कर ही बनाते काम सब
सत्य से नजरें चुराना आ गया॥

वह मिले कुछ इस तरह जागे हुए
नैन में सपना सुहाना आ गया॥